भंडारी गौत्रोत्पन्न श्री रामजीत जी जैन।
जैन जगत को जिन्हनें दीं हैं कई अनूठी देन।।
'वरहियान्वय' जैसी कृति जिनके श्रम का प्रतिफल है।
गौरवान्वित हो समाज ,रहा जिनका इस पर बल है।।
बिखरे सूत्रों को खोजा जिन्हने, कर अथक प्रयास।
अल्पख्यात वरहिया समाज को दिया प्रथम इतिहास।।
जिनकी लिखी दर्जनों कृतियाँ हुईं जैन जगत में चर्चित।
है श्री सिद्धक्षेत्र गोपाचल जैसी कृति संपूजित ,अर्चित।।
अखिल दिगंबर जैन जगत में मिला जिन्हें बहुमान।
वह ग्वालियर नगरी के रहवासी अभिभाषक श्रीमान।।
उनका महान अवदान भुलाया नहीं जा सकेगा।
हमसे उनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकेगा।।
✍🏻 श्रीश राकेश जैन (लहार)
जैन जगत को जिन्हनें दीं हैं कई अनूठी देन।।
'वरहियान्वय' जैसी कृति जिनके श्रम का प्रतिफल है।
गौरवान्वित हो समाज ,रहा जिनका इस पर बल है।।
बिखरे सूत्रों को खोजा जिन्हने, कर अथक प्रयास।
अल्पख्यात वरहिया समाज को दिया प्रथम इतिहास।।
जिनकी लिखी दर्जनों कृतियाँ हुईं जैन जगत में चर्चित।
है श्री सिद्धक्षेत्र गोपाचल जैसी कृति संपूजित ,अर्चित।।
अखिल दिगंबर जैन जगत में मिला जिन्हें बहुमान।
वह ग्वालियर नगरी के रहवासी अभिभाषक श्रीमान।।
उनका महान अवदान भुलाया नहीं जा सकेगा।
हमसे उनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकेगा।।
✍🏻 श्रीश राकेश जैन (लहार)



