नियंत्रणाधीन समाज की जो भी थाती है।
भट्टारक कोठी उनमें पहले आती है।
वरहिया समाज के गौरव की पहचान है ये।
पूरे समाज की आन-बान और शान है ये।
कोई आंच न आवे इसे, सभी का सपना है।
इसलिए इसे ,ऐसे हाथों में रखना है।
जो मन से और जतन से साज संभाल करे।कर्तव्य निबाहे बिना हिचक के ,बिना डरे।
जो कोठी के विकास के हित प्रतिबद्ध रहे।
उसकी संरक्षा को उद्यत, सन्नद्ध रहे।
यह बात सभी को अपने मन में गुनना है।
इसके निमित्त कर्मठ लोगों को चुनना है।
इस पर कोई छाया राजनीति की नहीं पड़े।
उन्नति के सोपानों पर यह दिन-रात चढ़े।






