आया फिर मौका चुनाव का।
जैन भवन के रखरखाव का।।
किसके सर दस्तार ~बंधेगी,
कौन करेगा ~ ~अगुआई ।
थाती की रखवाली ~~ तय,
करने की फिर बारी ~आई।।
इसीलिए ~ जिम्मेदारी से,
करना ~सबको ~वोट है।
और परखना भी है किसके,
मन में कितना ~ ~ खोट है।
जो भी पैनल हैं ~ चुनाव में
अपना विज़न करें ~ स्पष्ट।
ब्लूप्रिंट क्या है विकास का
यह भी बतलाएं, कर कष्ट।
फिर पैनल कोई जीते हारे
हर्षित होवे ~ ~सबका मन।
अपनी तो ये अभिलाषा है
जीते ~ केवल जैन भवन ।
(श्रीश राकेश जैन, लहार )
