बुधवार, 20 नवंबर 2024

वरहिया गौरव गान


श्री वीरमचन्द्र देव के वंशधरों की संततियां हैं हम।
धर्मालु,नैतिक,मूल्यनिष्ठ संख्या बल में हैं यद्यपि कम।
ये मूलसंघ,सरस्वतीगच्छ में शामिल एक उपजाति है।
जो गौरवशाली गण बलात्कारगण के अंतर्गत आती है।
हैं सभी 'वरहिया' कुंदकुंद के आम्नाय के अनुयायी।
जिस कारण उनकी चर्या में शुचिता स्वभावत: ही आई।
पंडित गोपालदास जी ने सौंपी है हमको जो थाती।
उनके द्वारा प्रज्वलित दीप की बुझने ना देंगे बाती।
उनके दिखलाए पथ पर चलकर आगे बढ़ते जाना है।
वरहिया जाति की कीर्ति पताका को नभ में फहराना है।