वरहिया -श्री , ब्लॉग दिगंबर जैन आम्नाय की वरहिया उपजाति की सामाजिक,सांस्कृतिक गतिविधियों के विविध आयामों को समेटकर बृहत्तर पटल पर उसकी उपस्थिति को दर्ज कराने का एक विनम्र प्रयास है |
बुधवार, 20 नवंबर 2024
वरहिया गौरव गान
श्री वीरमचन्द्र देव के वंशधरों की संततियां हैं हम।
धर्मालु,नैतिक,मूल्यनिष्ठ संख्या बल में हैं यद्यपि कम।
ये मूलसंघ,सरस्वतीगच्छ में शामिल एक उपजाति है।
जो गौरवशाली गण बलात्कारगण के अंतर्गत आती है।
हैं सभी 'वरहिया' कुंदकुंद के आम्नाय के अनुयायी।
जिस कारण उनकी चर्या में शुचिता स्वभावत: ही आई।
पंडित गोपालदास जी ने सौंपी है हमको जो थाती।
उनके द्वारा प्रज्वलित दीप की बुझने ना देंगे बाती।
उनके दिखलाए पथ पर चलकर आगे बढ़ते जाना है।
वरहिया जाति की कीर्ति पताका को नभ में फहराना है।
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