सोमवार, 29 जून 2026

तिलस्मी दुनिया के कैदी

 

मल्टीमीडिया मोबाइल कमोबेश आज हर लड़के लड़की के हाथ में है। उन्हें और कुछ आता हो या न आता हो, ज्यादा पढ़े-लिखे हों या न हों लेकिन इंटरनेट ब्राउजिंग में उन्हें महारत है और उसकी बेसिक शब्दावली और तौर-तरीकों से वे वाकिफ हैं। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर एक्टिव रहना उनका शगल है।उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश इंस्टाग्राम और फेसबुक सेंसेशन बनना है जिसके लिए वे पढ़ाई लिखाई और दूसरे जरूरी काम छोड़कर दिन-रात पूरी शिद्दत से लगे रहते हैं। सेलेब्रिटी बनने की चाहत में उनमें कुछ भी कर गुजरने का जुनून पैदा हो जाता है। दोस्तों के साथ गेट-टुगेदर और लेट नाईट पार्टी उनकी चर्या का हिस्सा बन जाती है।घाघ और शातिर लोग अपने काम करने का तरीका बदल चुके हैं और वे हाई प्रोफाइल और डिजिटल हो गए हैं।वे सोशल मीडिया पर सर्च कर ऐसे महात्वाकांक्षी बच्चों को टारगेट करते हैं और उनको फैशन परेड, अपैरल्स प्रमोशन, ब्यूटी प्रोडक्ट्स प्रमोशन के नाम पर शहर के बड़े होटलों में बुलाते हैं। जहां खाने-पीने का बढ़िया इंतजाम होता है। बच्चों को फैंटेसी की चकाचौंध भरी इस मायावी दुनिया का आकर्षण पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लेता है। प्रायोजक इन्हीं पार्टियों में शिकार का चुनाव करते हैं।आप कब दल-दल में फंस गए, आपको खुद पता नहीं चलता।होटल की तिलस्मी दुनिया का सारा सच आपकी बेटियां आपको नहीं बताएंगी। क्योंकि हो सकता है आपकी बेटी की मर्जी न हो और वह ब्लेकमेलिंग का शिकार हो। इन प्रमोशन इवेंट के एवज में उन्हें बाकायदा कन्वेयेंस और मेकअप का खर्चा और कुछ नकद प्रतिफल  मिलता है। जिसका कुछ हिस्सा वह घर वालों को देते हैं जिससे उनका मुंह बंद रहे वे ज्यादा  सवाल जबाव न करें। ज्यादा कमाई के झांसे में न आएं। सोशल मीडिया पर कमाई करना इतना आसान नहीं है। ज्यादा कमाई के लालच में बच्चे अक्सर गलत शाॅर्टकट चुन लेते हैं। इसलिए अपने बच्चों पर सतर्क नजर रखें। ज्यादा माडर्न और प्रोग्रेसिव बनने के चक्कर में कहीं वे घनचक्कर  न बन जाएं और कहीं के न रहें।आज अपराधियों ने अपना तरीका बदल दिया है। अब वे गली-मोहल्लों में नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर नजर गड़ाए बैठे हैं।







 

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