शनिवार, 1 फ़रवरी 2025

विमर्श -4


 वे ही हैं सरपंच कुछ भी फैसला लें।
उनका ही है मंच कुछ भी फैसला लें।
जिसे चाहें उसे 'तनखैया' बता दें।
गगनचुंबी को झुका नीचे गिरा  दें।
वरहिया  या  वरैया अथवा  बरैया,
वही होगा मान्य,जो वे तय  करेंगे।
तथ्य से उनको नहीं कुछ वास्ता है,
समर्थन वे स्वयं का निश्चय करेंगे।
हर तरफ इनका ही है अब दबदबा।
बह रही है आज इनकी ‌~  ‌ही हवा।
कौन इनसे उलझकर पंगा ~करेगा?
व्यर्थ में खुद ही को क्यों नंगा करेगा?
रिश्तेदारी टूटने का डर  ~ दिखाकर ,
आगापीछा सभी को उनका जताकर।
अंततः उनका ~ही पूर्वाग्रह  मनेगा !
उनका हठ ही सर्वसम्मत मत बनेगा!
इसलिए कुछ भी न कहना उचित है।
इस विषय में मौन रहना ~उचित है।
    


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें