नये वर्ष की, नई सुबह हो ~ मंगलमय।
सब हों सुखी,प्रसन्न ; न कोई भी हो भय।
पूर्ण मनोरथ हों, ~ जीवन में उन्नति हो।
त्यागें वैर,विरोध ; विमल सबकी मति हो।
एकसूत्र में बंधें ~ वरहिया जन सारे।
मनहर देव बनें, हम सब के रखवारे।
एक फर्श पर बैठें सभी, विचार करें।
जो भ्रांति पनपीं हैं,सबका परिहार करें।
भलीभांति होवे सबको, यह बात विदित।
निहित एकता में रहता है सब का हित।
हम पूज्य गुरुजी के ही सब अनुयाई हैं।
इस नाते हम सब एक और गुरु भाई हैं।
जब मंजिल सबकी एक चुनें क्यों राह अलग।
सब एक ओर ही चलें, रखें क्यों उलटे पग।

नव वर्ष लाए मंगलमय, सुख-शांति का उजियार,
जवाब देंहटाएंभय-द्वेष त्यागें हम सभी, प्रेम बने आधार।
एक सूत्र में बँधकर चलें, वरहिया जन एक,
एकता में ही निहित सदा, सबका सच्चा लेख।
गुरु पथ के हम अनुयायी, मंज़िल सबकी एक,
तो फिर क्यों हों राह जुदा, चलें साथ हर एक।