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बुधवार, 31 दिसंबर 2025

कामना


 नये वर्ष की, नई सुबह हो ~ मंगलमय।
सब हों सुखी,प्रसन्न ; न कोई भी हो भय।


पूर्ण मनोरथ हों, ~ जीवन में उन्नति हो।
त्यागें वैर,विरोध ; विमल सबकी मति हो।


एकसूत्र में बंधें ~ वरहिया जन सारे।
मनहर देव बनें, हम सब के रखवारे।


एक फर्श पर बैठें  सभी, विचार करें।
जो भ्रांति पनपीं हैं,सबका परिहार करें।


भलीभांति होवे सबको, यह बात विदित।
निहित एकता में रहता है सब  का हित।


हम पूज्य गुरुजी के ही सब अनुयाई हैं।
इस नाते हम सब एक और गुरु भाई हैं।


जब मंजिल सबकी एक चुनें क्यों राह अलग।
सब एक ओर ही चलें, रखें क्यों उलटे पग।