गुरुवार, 27 मार्च 2025

गुरुवर गोपालदास वरैया बेमिसाल हैं



 

कोई नहीं  है उनकी  समता का,
वैसी विलक्षण वक्तृत्व क्षमता का।
 

सम्मान उनको  मिला अपरंपार,
पर इससे ज्यादा के हैं वे हकदार।

संयत रहे, प्रतिकूलताओं में,
इस अर्थ में वे आत्मजेता थे।
पीढ़ियां उनको रखेंगी याद,
गुरुदेव ऐसे युग प्रणेता थे।

शास्त्रार्थ रण के निर्जयी गजकेसरी,
थीं मुग्ध जिन पर स्वयं मां वागीश्वरी।

 पंडित प्रवर,गुरुओं के गुरु,वाचस्पति,
व्यक्तित्व था ऐसा,ज्यों हों योगी यति।  

 वे सरलता और  सौम्यता की मूर्ति थे,

वे तर्कप्रिय थे ,न्याय की प्रतिमूर्ति थे। 

ज्ञान की अहर्निश प्रज्वलित मशाल हैं।

गुरुवर गोपालदास वरैया बेमिसाल हैं।।
  ✍🏻 श्रीश राकेश जैन, लहार

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