क्षमावाणी/क्षमा दिवस

क्षमायाचना करना तभी प्रयोजन भूत है जब क्षमा याचना करने वाले व्यक्ति को उससे प्रमादवश या जानबूझकर अथवा अनायास हुई गलती का अहसास हो और उस गलती के लिए उसके मन में पश्चाताप हो तथा उस गलती को भविष्य में न दोहराने का अव्यक्त रूप से निहित संकल्प और प्रतिबद्धता हो। क्षमावाणी के इस महापर्व का यही वास्तविक उद्देश्य है।क्षमायाचना आत्मकल्याण की भावना से उदात्तता और निर्मलता को लक्ष्य कर अपने व्यवहार का उत्तरोत्तर परिष्कार व परिमार्जन के निमित्त किया जाने वाला एक आदर्श धार्मिक उपक्रम है। क्षमा याचना की फलश्रुति क्षमा दान के रूप में होती है। जिसमें क्षमादान करने वाला व्यक्ति बड़ा दिल दिखाते हुए उसके प्रति की गई गलती को अनदेखा कर क्षमा दान कर नि:शल्य हो जाता है। जिसमें उसकी निश्छलता और बड़प्पन दोनों झलकते हैं। लेकिन बार-बार और सायास गलती करने वाले व्यक्ति द्वारा क्षमा याचना करना और अनचीन्ही व अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगना एक रस्म अदायगी या बड़प्पन का दिखावा भर है जो इस महान परंपरा का अभीष्ट नहीं है।
'खम्मामि सव्वे जीवाणां, सव्वे जीवा खमंतु मे,
मित्ति मे सव्व भूदेसु वैरं मज्झं ण केणवि'
(मूलाचार- 2/7)
'क्षमे सर्वजीवान् ,सर्वे जीवान् क्षमन्ताम् मम।
मैत्री मे सर्वभूतेषु ,वैरं मम न केनापि।'
मैं सभी जीवों को क्षमा करता हूँ ,सभी जीव मुझे क्षमा करें।मेरा सभी प्राणियों के प्रति मैत्री भाव है। मेरा किसी से भी बैर नहीं है।
प्रकारांतर से यही बात इन पदों में कही है -
मिच्छामि दुक्कडं /
मिथ्यामि दुष्कृताम् /
मेरे दुष्कृत्य मिथ्या हों
जाने-अनजाने जो कुछ भी भूल हुई हो।
या कोई प्रतिक्रिया किंचित प्रतिकूल हुई हो।
या राग-द्वेषवश कुछ भी अनुचित लिखा कहा हो।
मन में जिसके कारण चुभता शल्य रहा हो।
क्षमा-पर्व पर मांग रहा हूं क्षमा आपसे।
मुझे मिले उन्मुक्ति हुए इस महापाप से। 🙏🏻 श्रीश राकेश जैन
कभी अनजाने मन को ठेस लगाई,
जवाब देंहटाएंशब्दों में कड़वाहट बनकर छाई।
आज दिल से बस ये कहना है,
गलतियां मेरी, माफ कर देना ।
रिश्तों में कभी आया जो तकरार,
उसका सबब सिर्फ़ मेरा व्यवहार।
माफ़ कर दो दिल से मेरे दोष,
हो जाए दिलों में स्नेह का जोश।
भूल-चूक कभी हो गई मुझसे,
क्षमा मांगता हूँ सच्चे दिल से।
आज के क्षमावाणी के पावन अवसर पर सभी से
*मिक्षामी दुकणम*🙏🙏
*naveenjaintiger*🙏